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"One of the divine Jyotiringla among Twelve Jyotrinlingas in India"
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नारायण नागबली पुजा क्या है ? नारायण नागबली पूजा विधि , तिथियाँ, लाभ, प्रभाव और प्रक्रिया|

नारायण नागबलि पूजा

 

क्या है नारायणबलि और नागबलि पुजा? नारायण नागबलि यह नारायणबलि पूजा और नागबलि पूजा का एकत्रित स्वरूप है। इस पूजा का आयोजन भारत में सिर्फ त्र्यंबकेश्वर मंदिर नासिक में ही किया जाता है। प्राचीन दस्तावेज एवं आध्यात्मिक ग्रंथोमे इस पूजा की विधि दी गयी है और केवल त्र्यंबकेश्वर में इस पूजा को कराने की सूचना की गयी है। नारायण नागबलि  को पितृदोष निवारण पूजा भी कहा जाता है।

नारायण नागबलि पूजा क्या है?

नारायण नागबलि पूजा यह पितरोंके मुक्ति के लिए की जानेवाली महत्वपूर्ण पूजा है। इस पूजा में नारायण पूजा और नागबलि पूजा एकत्रित की गयी है। ऐसी मान्यता है की हमारे पूर्वजो द्वारा किसी की मृत्यु नाग के डसे जाने से हुई है तो हमें इसका ज्ञान नहीं होता। तथा परिवार के अनेक सदस्योंकी मृत्यु का कारण निश्चित पता न होने से इन्हे अकाल मृत्यु द्वारा परलोक में स्थान नहीं मिलता। जिसके कारण वे पृथ्वीपर ही भटकते रहते है। पूर्वजों द्वारा परिवार के सदस्योंको पितृदोष लगता है। और ऐसे परिवार में जन्म लेने वाले व्यक्ति की जन्मकुंडली में यह पितृदोष देखा जाता है। नारायण पूजा से पितृदोष का निवारण होता है तथा नागबलि से नागमृत्यु के पाप से मुक्ति मिलती है। इन दोनों पुजाओंको एकत्रित कराने से ही यह दोष मिटता है, अन्यथा आने वाली पीढ़ियोंको यह दोष लगता है और जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नारायण नागबलि पूजा कराने का विधान प्राचीन शास्त्रोमे कहा गया है। मृत परिजन का नाम पता न होने के कारण इस पूजा में गोत्र तथा नाम का उच्चार निषिद्ध माना गया है।

पितृदोष के लक्षण:

  • स्वप्न में नाग दिखाई देना एवं नाग पीछे पड़ जाना।
  • परिवार में आपसी झगड़े होना।
  • संतानसुख का लाभ न होना अन्यथा गर्भपात होना।
  • व्यापार में नुकसान एवं पैसे की बर्बादी होती है।
  • पढ़ाई में मन एकाग्र ना होना।
  • परिवार में बार-बार स्वास्थ्य की समस्याएं उत्पन्न होना।
  • कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं।
  • नौकरी में उतार-चढाव तथा प्रमोशन न मिलना।
  • शादी-विवाह टूटना। 

नारायण नागबलि के नियम: 

  • यह पूजा कुल ३ दिन की होती है किन्तु पूजा के एक दिन पहले त्र्यंबकेश्वर में आना अनिवार्य है। 
  • यह पूजा केवल पुरुष कर सकते है क्यूंकि शास्त्रों के अनुसार स्त्री अकेली यह पूजा नहीं कर सकती।
  • गर्भवती महिला को पाँच महीने तक गर्भावस्था होने पर यह पूजा करने का अधिकार है।
  • पूजा के काल में व्यक्ति को खान पान में परहेज करना आवश्यक होता है, जैसे प्याज, लहसुन युक्त भोजन वर्ज्य है। 
  • पूजा कालावधि में व्यक्ति त्र्यंबकेश्वर छोड़कर नहीं जा सकता, क्युकी यह अनुष्ठान अधूरा नहीं छोड़ा जाता। 
  • पूजा के लिए विशेष पहराव होता है जिसमे धोती, रुमाल पुरुषोंको परिधान करना होता है तथा स्त्रियों को सफेद साडी पहननी होती है। 
  • इस पूजा को करने हेतु त्र्यंबकेश्वर आने से पहले कम से कम ४ दिन पूर्व पूजा आरक्षित की जानी आवश्यक है। 

नारायण नागबलि पूजा विधि:

  • नारायण नागबलि पूजा के पहले दिन श्राद्धकर्ता को कुशावर्त तीर्थपर स्नान करने के पश्चात नए वस्त्र धारण करने होते है।  
  • पुरूषोंने धोती, कुर्ता तथा महिलाओंने सफेद साडी पहननी होती है।  
  • पूजा का संकल्प लेने के बाद न्यास किया जाता है।   
  • न्यास के तुरंत बाद कलश की स्थापना की जाती है जिसमे गुरूजी द्वारा भगवान श्री विष्णु एवं यमदेव का पूजन किया जाता है।   
  • इस दिन दशदान किये जाते है, तथा जलाशय की जगह पिंडदान भी किया जाता है
  • नारायण नागबलि पूजा के दूसरे दिन श्री विष्णु तर्पण के साथ प्राणप्रतिष्ठा की जाती है और हवन करके श्राद्ध संपन्न किया जाता है।   
  • नारायण नागबलि पूजा के तीसरे दिन पूजा के अंतिम दिन श्री गणेश भगवान का पूजन किया जाता है।   
  • नाग की सुवर्णप्रतिमा का पूजन किया जाता है।  
  • गुरूजी को दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाता है।
  • अंतिम विधि में श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंगके दर्शन व पूजन करके पूजा सम्पन्न की जाती है।

नारायण नागबलि पूजा से होनेवाले लाभ:

  • आरोग्य में सुधार होना। 
  • पितृदोष एवं पितृशाप से मुक्ति प्राप्त होना। 
  • पितृदोष के कारण आया हुआ सभी नकारात्मक प्रभाव दूर होना। 
  • पति पत्नी में होनेवाला मतभेद दूर होना। 
  • परिवार में शांति आना। 
  • संतानप्राप्ति होना।  
  • नाग का स्वप्न में दिखना बंद होना। 
  • व्यापार में धनलाभ होना। 
  • नौकरी में ऊँचे पद की प्राप्ति होना। 
  • उत्तम आरोग्य का लाभ होना।

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नारायण नागबलि पूजा दक्षिणा:

नारायण नागबलि पूजा में उपयोग आनेवाली सामग्री के आधार पर दक्षिणा निर्धारित होती है। पूजा के समय व्यक्ति को केवल वस्त्र लाना होता है। पूजा के लिए यात्रीगण एवं भक्तोंका आवास उनकी इच्छानुसार करना होता है जिसका खर्च पूजा की दक्षिणा में नहीं जोड़ा जाता। आवास का किराया अलग से करना होता है।

साल २०२१ में नारायण नागबलि पूजा मुहूर्त:

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में नारायण नागबलि पूजा कराने का विशेष अधिकार ताम्रपत्रधारी पण्डितजी को वंश-परम्परा से प्राप्त है। इस विशेष पूजा का मुहूर्त ताम्रपत्रधारी पण्डितजी संपर्क करने से बताते है।

त्र्यंबकेश्वर में नारायण नाग बली पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ पंडित 

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में परंपरागत अधिकार के अनुसार की जानेवाली पूजा केवल ताम्रपत्रधारी गुरूजी ही कर सकते है। इस मंदिर में सदियोसे विभिन्न धार्मिक पुजाएँ चली आ रही है, जिसका अधिकार यहाँ के स्थानिक पुरोहित के पास होता है। सरदार श्री बालाजीराव पेशवा द्वारा दिए गए ताम्रपत्र पर यह अधिकार अंकित किया गया है। नारायण नागबलि पूजा त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पूर्व दरवाज़े पर स्थित अहिल्या गोदावरी मंदिर एवं सती महाश्मशान में की जाती है।

त्र्यंबकेश्वर पण्डितजी से कैसे संपर्क करे? 

जब कभी आप पावन त्र्यंबकेश्वर भूमि में कोई भी धार्मिक पूजा कराना चाहते हो तो; पूजा के जानकारी के लिए पुरोहित संघ वेबसाइट को आवश्यक भेट दे। इस वेबसाइट से आप त्र्यंबकेश्वर ताम्रपत्रधारी गुरूजी से संपर्क कर सकते है, गुरूजी आपको पूजा की सभी जानकारी देंगे। आप वेबसाइट से ऑनलाइन पूजा बुक भी कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए उनका फ़ोन नंबर भी दिया है। क्रिपया इसका लाभ उठाये। 

07 Jun '21 Monday

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