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Trimbak Mukut

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"One of the divine Jyotiringla among Twelve Jyotrinlingas in India"
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रुद्राभिषेक पूजा का विधि, मुहूर्त, सामग्री और फायदे

रुद्राभिषेक पूजा 

रूद्र अभिषेक कैसे होता है ? रुद्राभिषेक भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए एक महत्वपूर्ण पूजा है। इस पूजा को भक्त अपने घर में या शिवालय (शिव मंदिर) की जगह करते है। सावन में रूद्र अभिषेक का महत्व अधिक होता है। सावन मास में गंगाजल एवं दूध से रुद्राभिषेक करना भगवान शंकर को अतिप्रिय है। इसके पीछे विशेष कारण है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भोलेनाथ से विवाह करने के लिए सावन मास में अतिकठोर तपस्या की थी जिसके फल स्वरूप भोलेनाथ ने माता पार्वती से विवाह करने के लिए वचन दिया। भोलेनाथ ने माता पार्वती को अन्य वचन भी दिया जिसमे उन्होंने कहा की, “जो भक्त सावन महीने में सच्चे भाव से शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करेगा उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।” इसीलिए अविवाहित स्त्री एवं पुरुष मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए सावन महीने में शिवालय में जाकर रुद्राभिषेक करते है।

फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि त्यौहार के रूप में मनाया है। शिवमहापुराण के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ का विवाह हुआ था इसीलिए इस दिन जो भक्त व्रत-उपवास रखकर शिवमंदिर में जाकर रुद्राभिषेक करता है, उस पर भोलेनाथ की कृपा आजीवन बनी रहती है। महाराष्ट्र में नासिक शहर में १२ ज्योतिर्लिंगोमे से अतिपवित्र माना जानेवाला श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है की यहाँ महादेव शंकर, ब्रह्मा एवं विष्णु एकत्रित रूप में विराजमान है। इस ज्योतिर्लिंगमे तीन कपार है जहाँ त्रिदेव ज्योतिर्लिंग रूप में तथा माँ गंगा जल रूप में विराजमान है। ऐसी मान्यता है के ज्योतिर्लिंग के पावन मंदिर में रुद्राभिषेक पूजा कराने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है एवं पापोंसे तुरंत छुटकारा मिलता है।

रुद्राभिषेक पूजा विधि 

  • रुद्राभिषेक पूजा में बारी-बारीसे जल, दूध, दही, शक़्कर एवं शहद से अभिषेक किया जाता है।
  • प्राचीन रुद्राभिषेक विधि अनुसार शुक्ल यजुर्वेद में रुद्राभिषेक पूजा की विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है।
  • रुद्राभिषेक विधि में कुल मिलाकर १० पाठ होते है, लेकिन इनमे केवल ८ पाठ ही किये जाते है, बचे २ पाठ शान्ति अध्याय एवं स्वस्ति प्रार्थनाध्याय है।
  • ८ अध्याय मिलाकर अष्टाध्याय का पाठ किया जाता है - जिसे रूपक एवं षडंग पाठ कहा जाता है।
  • सम्पूर्ण रुद्राष्टाध्याय का वाचन करते समय आठवाँ एवं पाँचवा अध्याय पुनरावृति में नहीं लिया जाता, जिसे नमक-चमक से अभिषेक करना कहा जाता है।
  • रुद्राष्टाध्याय पाठ सम्पूर्ण होने पर शान्तिपाठ एवं स्वस्ति प्रार्थनाध्याय लिया जाता है, जिसके बाद पण्डितजी को दान-दक्षिणा देकर रुद्राभिषेक सम्पन्न होता है।

लघुरूद्राभिषेक पूजा क्या होती है?

रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करते समय पाँच तथा आठवाँ अध्याय को “नमक चमक पाठ” कहा जाता है। नमक चमक पाठ के ११ आवर्तन पुरे होने पर इसे “एकादशिनि रुद्री” पाठ कहा जाता है तथा एकादशिनी रुद्री पाठ के ११ आवर्तन पूर्ण होने पर इसे “लघु रुद्री” पाठ कहा जाता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार लघुरूद्री या “लघुरूद्राभिषेक”| कराने पर साधक को मोक्षप्राप्ति होती है।

रुद्राभिषेक पूजा सामग्री  

  • पंचामृत जिसमे दूध, शुद्ध देसी घी, दही, शक़्कर एवं  शहद का उपयोग होता है। 
  • बेल पत्र (बेल के पत्ते), सुगन्धि फूल, गुलाबजल
  • अष्ट गंध, यज्ञोपवीत गंगाजल, रुद्राक्ष भस्म, नैवेद्य के लिए मिठाई
  • उपलब्ध होने पर गन्ने का रस भी अभिषेक के लिए उपयोग होता है। 
  • नारियल पानी एवं चावल (अक्षता) भी रुद्राभिषेक में विशेष माने जाते है।
  • ऋतु के अनुसार जो भी फल उपलब्ध है वो रुद्राभिषेक में समर्पित किये जाते है।

रुद्राभिषेक के फायदे 

  • इस पूजा के प्रभाव से बिगड़े कार्य बन जाते है।
  • जीवनमे सफलता मिलती है। 
  • परिवार को सुख-शांति की प्राप्ति होती है। 
  • व्यापार में वृद्धि एवं आर्थिक समस्या का हल होता है। 
  • स्वास्थ से जुडी परेशानियाँ दूर होती है। 
  • आपसी मनमुटाव मिट जाता है। 
  • कुंडली में विपरीत ग्रह शांत हो जाते है, विशेष तौर पर मंगल ग्रह की शान्ति का उपाय रूद्राभिषेक से तुरंत संभव होता है।   
  • नौकरी में ऊँचे पद की प्राप्ति होती है।  
  • भविष्य में आने वाले संकट मिट जाते है।  
  • ग्रहबल बढ़ता है एवं पितृदोष नष्ट होता है।   
  • पुष्य, आश्लेषा एवं पुनर्वसु नक्षत्रोंका जीवन पर होनेवाला नकारात्मक प्रभाव नष्ट हो जाता है।

रुद्राभिषेक के मुहूर्त

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में प्राचीन समय से आधिकारिक तौर पर विशेष पण्डितजी द्वारा पूजा की जाती है, जिन्हे ताम्रपत्रधारी पण्डितजी कहा जाता है। रुद्राभिषेक पूजा करने के लिए उचित समय एवं मुहूर्त की जानकारी त्र्यंबकेश्वर पण्डितजी बताते है। इस पूजा के नियम आदि मालुम करने के, मुहूर्त देखकर आप त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में रुद्राभिषेक पूजा कर सकते है|

पुरोहित संघ पण्डितजी आप को त्र्यंबकेश्वर में की जानेवाली सभी धार्मिक पुजाओंके बारेमें मार्गदर्शन प्रदान करते है। आपकी आवश्यकता के अनुसार पुरोहित संघ गुरुजीसे मार्गदर्शन पाकर पूजा के एक दिन पहले आपको त्र्यंबकेश्वर में आना जरुरी है। आपका मार्गदर्शन हो इस उद्देश्य से पुरोहित संघ संस्था द्वारा अधिकृत वेबसाईट बनाई गयी है, कृपया इसका लाभ उठाए।

 

16 Jun '21 Wednesday

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