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Trimbak Mukut

"One of the divine Jyotirlinga among Twelve Jyotirlingas in India"

Trimbak Mukut

पितृ दोष क्या होता है ? उसके दुष्परिणाम कैसे दूर करे ? पितृ दोष निवारण पूजा की विधि जानिए

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पितृ दोष क्या होता है?

पितृ दोष यह कुंडली में दिखाई देने वाला दोष होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उसे पितृ दोष निवारण पूजा करने से अवश्‍य ही लाभ होगा । पितृ दोष के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए ही यह पूजा की जाती है। पितृ दोष के साथ जन्म लेनेवाले साधक के जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव तथा कठिनाइयाँ उत्पन्न होती रहती है। कुछ परिवारोंमें जन्म लेने वाले बच्चो में पितृ दोष  देखा जा सकता है, जहाँ शारीरिक एवं मानसिक विकलांगता होती है। पित्रों के शाप के कारण होने वाले दोष को “पितृ दोष” कहा जाता है। पितृ दोष  का मूल कारण है पित्रों की श्राद्ध पूजा न करना। 

जब परिवार का कोई सदस्य अकाल मृत्यु से या शादी के पहले या अन्य किसी कारण से मृत होता है तो उसका श्राद्ध होना आवश्यक है। ऐसे में श्राद्ध न किये जाने से उस व्यक्ति की आत्मा भटकती रहती है, उसे पृथ्वी पर जन्म भी  नहीं मिलता। साथ यही परलोक में भी जगह नहीं मिलती जिस कारण वह आत्मा दुखी रहती है, परेशान रहती है और परिवार में जन्मे अन्य बच्चोंको परेशान करती है या उनकी जीवन में कठिनाइयाँ लाती है। ऐसे में उस व्यक्ति के जन्मकुंडली में ९ स्थान पर जिसे भाग्यस्थान भी कहा जाता है, वहाँ यह पितृ दोष  दिखाई देता है। जिसकी वजह से भाग्योदय होने में देरी तथा परेशानियाँ बनती है।

पितृ कौन है?

हमारे परिवार के पूर्वज यानी पितृ होते है। मृत परिजनों का विधिवत श्राद्ध कराया जाना आवश्यक है तथा श्राद्ध पक्ष की तिथियों में लोग अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण करते हैं। भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की कृष्ण अमावस्या तक की अवधि को पितृपक्ष कहा जाता हैं। पितृपक्ष में पूर्वजों की शांति के लिए पितृ दोष  पूजा की जाती है। पित्रों की शांति न होने से पितृ दोष  लगता है।

पितृ दोष पूजा मुहूर्त २०२२ 

पितृ दोष पूजा शास्त्र विधि के अनुसार पण्डितजी द्वारा त्र्यंबकेश्वर में की जाती है। त्र्यंबकेश्वर में गुरूजी को ताम्रपात्रधारी पण्डितजी के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के मुख्य पुरोहित के रूप में गुरूजी कार्यरत रहते है। अनेक पीढ़ियों से पितृ दोष निवारण पूजा का आयोजन पण्डितजी द्वारा किया जाता है। पितृ दोष पूजा के मुहूर्त की अधिक जानकारी के लिए आप त्र्यंबकेश्वर पण्डितजी से संपर्क कर सकते है।

 

पितृ दोष के परिणाम

  • पितृ दोष के कारण जन्म से ही मानसिक या शारीरिक अंगो का विकास ठीक ढंग से नहीं होता।
  • बाल्यावस्था में अनेक रोग एवं व्याधि शरीर को व्याप्त करती है।
  • कुमारावस्था में पढ़ाई में मन नहीं लगता, या शिक्षा में बार बार बदलाव होता है। 
  • किशोरावस्था में व्यसन घेर लेते है। पढ़ाई बीच में ही अधूरी रह जाती है।
  • प्रौढ़ावस्था में नौकरी, व्यापार तथा शादी में स्थिरता प्राप्त नहीं होती। 
  • नौकरी में बदलाव, प्रमोशन ना मिलना, व्यापर में नुकसान, शादी होने में परेशानी होती है। 
  • शादी के बाद पति और पत्नी के रिश्तो में तनाव, विवाद एवं झगड़ा होता है। 
  • महिलाओं को गर्भधारणा में समस्या होती है या गर्भपात की संभावना होती है। 
  • पितृ दोष के कारण जीवन में सफलता नहीं मिलती, धन का अभाव, कर्जे में डूब जाना ऐसी अनेक परेशानियाँ आती है।
  • पितृ दोष के कारण हमारे पूर्वज स्वप्न में आकर हमसे खाना या कपड़ा माँगते है। 
  • पितृ दोष के वजह से स्वप्न में नाग दिखाई देता है, जो हमारा पीछा करता है।

पितृ दोष पूजा विधि 

हमारे पूर्वज जो मृत्यु के पश्चात श्राद्ध के बिना पिशाच योनि धारण करके पृथ्वी पर भटकते है, जिस कारण उन्हें अनेक कष्टों का अनुभव होता है। उनकी आत्मा को उनके परिवार में जन्मे वंशजों से आशा होती है, की वे उनकी मुक्ति का उपाय करे। उनके उत्तराधिकारी या वंशजों द्वारा पितृ शांति उपाय करने से उन्हें प्रसन्नता होती है और वे अपने वंशजों को अनेक आशीर्वाद प्रदान करते है।

  • पितृ दोष निवारण पूजा त्र्यंबकेश्वर में होने वाली विशेष पूजा है।  
  • इस पूजा से एक दिन पूर्व त्र्यंबकेश्वर में उपस्थित रहना आवश्यक है।
  • पूजा आरंभ होने से पूजा की समाप्ति तक व्यक्ति त्र्यंबकेश्वर छोड़कर अन्य स्थान पर नहीं जा सकता।
  • पूजा के पश्चात आखिरी दिन दोपहर १२ के बाद श्राद्धकर्ता मुक्त होता है। 
  • यह पूजा जोड़े से की जाती है, परन्तु महिला पिंडदान विधि अकेले नहीं कर सकती।
  • यह पूजा ३ दिन की जाती है एवं पूजा के बाद ४१ दिन तक खान-पान के नियम रखने आवश्यक है। 
  • पूजा के दिनों में व्यक्ति प्याज तथा लहसुन वाला खाना नहीं खा सकता।
  • पूजा के बाद के ४१ दिनों तक पूजा में उपस्थित कोई भी व्यक्ति मांस तथा शराब का सेवन नहीं कर सकता। 
  • पूजा में बैठने वाले पुरुषों को नए वस्त्र जैसे सफेद धोती, कुरता तथा महिलाओं को सफेद रंग की साड़ी पहनना आवश्यक है। पूजा की समाप्ति के पश्चात पूजा की दक्षिणा एवं दान देना होता है।

पितृ दोष पूजा सामग्री

रोली, जनेऊ, कपूर, शहद, चीनी, हल्दी, रक्षा सूत्र, हवन सामग्री, देसी घी, मिष्ठान, गंगाजल, कलावा, गुलाबी कपड़ा, हवन के लिए आम की लकड़ी, आम के पत्ते और पांच प्रकार की मिठाई ।

पितृ दोष निवारण मंत्र 

  • पूर्वजों के स्मरण में प्रतिदिन ॐ श्री पितराय नम: तथा ॐ श्री पितृदेवाय नमः का २१ बार जाप करें।
  • ॐ श्री पितृभ्य: नम: मंत्र का ५१ बार जाप करने से पित्रों को प्रसन्नता होती है।
  • ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः मंत्र का १०८ बार जाप करने से पित्रों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
  • देवताभ्यः पितृभ्यश्च महा योगिभ्य एव  च ।
  • नमः स्वाहायै स्वधायै  नित्यमेव नमो नमः ।।
  • ब्रह्म पुराण में इस मंत्र को पितृ गायत्री मंत्र कहा गया है, इस मंत्र कि हररोज़ १ माला या अधिक जाप करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

पितृ दोष शांति के उपाय 

१) सोमवती अमावस्या का दिन पितृ दोष निवारण पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।  इस दिन पितृ दोष पूजा कराने से पितृ दोष दूर होता है।

२) पितृ दोष निवारण पूजा अमावस्या तिथि, या पितृ पक्ष के काल में किसी भी दिन की जा सकती है। इस पूजा का उत्तम काल दोपहर का होता है।

३) पितृ पक्ष में हररोज़ पित्रों की शांति के निमित से जल, जौं और काले तिल एवं पुष्प के साथ पित्रों का तर्पण कराने से पितृ दोष दूर होता हैं।

४) पित्रों की मृत्यु तिथिका पता न हो तब सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कराना चाहिए जिसके प्रभाव से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। 

५) सर्व पितृ अमावस्या और हर अमावस्या के दिन १३ ब्राह्मणों को भोजन दीजिए एवं आपकी इच्छानुसार दक्षिणा देकर आशीर्वाद लेने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

६) पितृ पक्ष में कौवों को भोजन कराने से पितृ दोष में राहत मिलती है। ऐसी मान्यता है की, पितृ पक्ष में हमारे पितृ कौवों का रूप धारण करके धरती पर अपने परिवार के वंशजों के पास भोजन प्राप्त करने जाते हैं।

७) पितृ पक्ष में गाय की सेवा करने से पित्रों को शांति मिलती है तथा गाय को भोजन कराने से विशेष लाभ मिलता है।    

८) महामृत्युंजय मंत्र का जाप २१ सोमवार तक करने से पितृ दोष  का प्रभाव कम होता है।

९) प्रतिदिन इष्ट देवता एवं कुल देवता की पूजा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से भी पितृ दोष का प्रभाव काम होता है।

१०) पीपल के वृक्ष की १०८ दिन तक निरंतर १०८ परिक्रम करें एवं पित्रों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगें।

पितृ दोष पूजा की दक्षिणा  कितनी है? 

पितृ दोष पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री एवं पण्डितजी पर पितृ दोष पूजा की दक्षिणा निर्धारित होती है। इस पूजा में कितने गुरूजी उपस्थित होंगे इस पर भी पूजा का मूल्य निर्भर होता है। 

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