Search Bar Design
Search Bar Design
Search Bar Design
Trimbak Mukut

Articles
"One of the divine Jyotiringla among Twelve Jyotrinlingas in India"
trimbak Mukut
Search Bar Design

त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा के विधि, सामग्री, मुहूर्त और फायदे

त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा

 

त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा क्या है? त्रिपिंडी मतलब ३ पिढियों का पिंडदान। त्रिपिंडी श्राद्ध, श्री त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में कुशावर्त तीर्थ पर होनेवाली महत्वपूर्ण पूजा है। इस पूजा में तीन पीढ़ियों के पिंड सम्मिलित किए जाते है इसलिए इस पूजा को त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा कहा जाता है। पिता पहली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते है, दादाजी दूसरी पीढ़ी एवं परदादा (दादाजी के पिताजी) की पीढ़ी में जिन भी व्यक्तियों का विधिवत श्राद्ध नहीं होता उन्हें परलोक में स्थान नहीं प्राप्त होता। परिवार के सदस्य की अकस्मात मृत्यु होनेपर, अन्यथा किसी सदस्य की शादी के पहले मृत्यु होने पर उन्हें मोक्ष नहीं मिलता। ऐसे में मृत परिजन की आत्मा को शान्ति प्राप्त हो इस उद्देश्य से प्रथम वर्ष में वार्षिक श्राद्ध, दूसरे वर्ष एवं तीसरे वर्ष में सांवत्सरिक श्राद्ध और महालया श्राद्ध किया जाता है।  

ऐसे में जब इन तीन पीढ़ियों में मृत परिजन के पहले तीन वर्षोमें श्राद्ध विधि न किये हो तो उसकी आत्मा को पुनर्जन्म नहीं मिलता। वे वर्तमान पीढ़ी में जन्मे वंशजों को परेशान करते है। त्रिपिंडी श्राद्ध पूजाके प्रभाव से उनकी आत्मा को शान्ति प्राप्त होती है एवं वे पुनर्जन्म ले पाते है।  

त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा के नियम

  • त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा करने से एक दिन पहले त्र्यंबकेश्वर आना आवश्यक है।
  • पुरुषोने पूजा के दिन सफेद कुरता एवं धोती पहनना जरुरी होता है एवं महिलाओंने सफेद साडी पहननी जरुरी है। काले वस्त्र पूजा में नहीं पहनना चाहिए।
  • पूजा के समय श्राद्धकर्ता केवल सात्विक भोजन यानी प्याज और लहसुन विरहित आहार करे।       

त्रिपिंडी श्राद्ध विधि 

  • त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा की शुरुआत करने से पहले भक्तों को त्र्यंबकेश्वर मंदिर के समीप कुशावर्त तीर्थ पर स्नान करना होता है जिसके पश्चात सफेद वस्त्र धारण करने होते है।
  • इस पूजा को विशेष पण्डितजी द्वारा किया जाता है जिन्हे ताम्रपत्रधारी पण्डितजी कहा जाता है।
  • पूजा के आरम्भ में श्राद्ध किया जाता है जिसमे पिंडदान करना होता है।
  • पिंडदान के लिए तीन पीढ़ियों के लिए पिंड बनाए जाते है, जिन पर चीनी, शहद एवं शुद्ध तूप अर्पित किया जाता है।
  • पिंड की पूजा करने के पश्चात श्री विष्णु पूजा तर्पण के माध्यम से की जाती है।
  • पूजा के बाद पण्डितजी को सोना, चाँदी, छाता, खडावा, कमंडलू,  पात्र इत्यादि वस्तुओंका दान दिया जाता है एवं दक्षिणा दी जाती है।

त्रिपिंडी श्राद्ध की सामग्री

  • तीन देवताओंकी सोना, चांदी तथा ताम्र से निर्मित प्रतिमा। 
  • पिंडदान के लिए काला तील, जौ, तथा चावल के बने पिंड।
  • ताम्र धातू से निर्मित ३ कलश, पुर्णपात्र, गंगाजल, गाय का दूध।
  • आसन, अगरबत्ती, रक्षा सूत्र, जनेऊ, रुद्राक्ष माला, फूल माला।
  • खीर, देसी घी, पंच रत्न, बर्फी, मिठाई, पंचमेवा, लड्डू, खोवा।
  • रुई बत्ती, माचिस, कपूर, अगरबती, घंटा, शंख, हवन पैकट।
  • पान के पत्ते, सुपारी, चावल, गेहूँ, हल्दी, सिंदूर, गुलाल। 
  • नारियल, लोटा (बर्तन), हल्दी पाउडर, कुंकुम, रोली, लौंग, उपला। 
  • मूंग, ऊड़द, शहद, चीनी, गुड़, दूध, ईलायची, केला, तुलसी का पत्ता।  
  • पिली सरसों, भगुनी, परात, चना दाल, काला उरद, सरसों का तेल।  

त्रिपिंडी श्राद्ध के फायदे

  • त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा कराने से पित्रोको शान्ति मिलती है तथा घर में किए जाने वाले मंगल कार्य जैसे नामकरण, शादीमें आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। 
  • पूजा के बाद हर काय में उन्नति, सफलता की नयी ऊंचाई, धन में वृद्धि होती है। 
  • नौकरी में प्रमोशन तथा व्यापार में फायदा होता है। 
  • समाज में खोया हुआ सम्मान प्राप्त होता है। 
  • घर-परिवार में आपसी रिश्तों में सुधार होता है। 
  • आरोग्य में अच्छा बदलाव होता है, प्रकृति स्थिर होती है।

त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा की दक्षिणा

इस पूजा की दक्षिणा पूजा के दौरान उपयोग में आनेवाली सामग्री पर आधारित होती है। 

त्रिपिंडी श्राद्ध मुहूर्त 2021

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास कुशावर्त तीर्थ पर त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा की जाती है। त्रिपिंडी श्रद्धा पूजा के सही मुहूरत के लिए आपको त्रिम्बकेश्वर पंडितजी से संपर्क करना पड़ेगा। वो आपको आपकी कुंडली देख कर सही मुहूर्त बताएँगे।

त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा करनेवाले पण्डितजी कौन है? 

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा करनेका विशेष अधिकार ताम्रपत्रधारी गुरूजी को ही प्राप्त होता है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में परंपरागत पूजा चलती आ रही है जो ताम्रपत्रधारी गुरूजीद्वारा की जाती है, इनके पास ताम्बे की धातु से बना हुआ पेशवाकाल में दिया हुआ ताम्रपत्र है, जिसका संरक्षण आज पुरोहित संघ संस्था द्वारा किया जाता है। 

जो भक्त त्र्यंबकेश्वर में पूजा कराने इच्छुक है उन्हें सचेत किया जाता है की ताम्रपत्र एवं आधिकारिक प्रमाणपत्र की पहचान कराने पश्चात ही पूजा करे अन्यथा पूजा का लाभ मिलने में कठिनाई होने की संभावना को टाला नहीं जा सकता। 

पुरोहित संघ त्र्यंबकेश्वर के अधिकृत वेबसाइट के साथ आप ऑनलाइन पूजा भी बुक कर सकते हो।

ऑनलाइन त्र्यंबकेश्वर पूजा बुकिंग 

 

11 Jun '21 Friday

Copyrights 2020-21. Privacy Policy All Rights Reserved

footer images

Designed and Developed By | AIGS Pvt Ltd

whatsapp icon