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त्र्यंबकेश्वर मंदिर

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"भारत में बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक दिव्य ज्योतिर्लिंग है"
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त्र्यंबकेश्वर मंदिर

इस जीवन मे सभी समस्याओ के लिए आध्यात्मिक निवारण हैं और विभिन्न अनुष्ठान करना उनमे से ही एक है। यह माना जाता है की, अन्य मंदिर के तुलना मे त्र्यंबकेश्वर मंदिर मे पूजा करने से अधिक लाभ होता है। विभिन्न अनुष्ठान जैसे नारायण नागबली, कालसर्प पूजा, महामृत्युंजय मंत्र जाप, त्रिपिंडी श्राद्ध, कुंभ विवाह,रूद्र अभिषेक यहाँ त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर मे अधिकृत पुरोहितो और ब्राह्मणो के मार्गदर्शन मे ही किए जाते है। इन पुरोहितो को ताम्रपत्र धारी के नाम से जाना जाता है।

Trimbakeshwar temple

महाराष्ट्र के नासिक शहर से २८ किलोमीटर दुरी पर त्र्यंबकेश्वर महादेव हिंदू मंदिर है। यह शिव मंदिर १२ ज्योतिर्लिंगों मे एक जाना जाता है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर के परिसर मे ब्रह्मगिरि पर्वत (जहा पवित्र नदी गंगा का उगमस्थान है) , कुशावर्त कुंड (पवित्र तालाब) है। कुशावर्त कुंड श्रीमंत सरदार रावसाहेब पार्नेकर द्वारा निर्मित है| जो इंदौर शहर के फडणवीस के नाम से जाने जाते थे| तथा वर्तमान त्र्यंबकेश्वर मंदिर श्रीमंत नानासाहेब पेशवा द्वारा सण १७५५-१७८६ मे निर्मित है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर ब्रह्मगिरि पर्वत के तलहटी पर बना है, जहा महाराष्ट्र की सबसे लम्बी गंगा नदी का उगमस्थान है। त्र्यंबक शब्द का अर्थ 'त्रिदेवता' (भगवन ब्रह्मा, विष्णु, महेश। मंदिर एक बीस से पच्चीस फुट की पत्थर की दीवार से बना है जो त्र्यंबकेश्वर मंदिर को एक समृद्ध रूप देता है। त्र्यंबकेश्वर दर्शन का समय सुबह ५. ३० बजे से शाम ६. ३० बजे तक है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर ऑनलाइन पूजा बुकिंग:

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का रहस्य:

Jyotirlinga

शिव पुराण के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा ( सृजन ) और विष्णु (संरक्षण) की आपस मे सृजन के वर्चस्व के लिए बहस हुइ। भगवान शिवा ने उन दोनों की प्रकाश स्तम्भ को ढूंढने के लिए परीक्षा ली। दोनों भगवान ब्रह्मा और विष्णु ने अपना मार्ग उस प्रकाश स्तम्भ पाने के कारन विभाजित कर लिया और भगवन ब्रह्मा ने झूट बोला जबकि भगवान विष्णु ने अपनी हार का स्वीकार कर लिया। तब भगवान शिवा ने ब्रह्म देव को शाप दिया की वे कभी भी किसी पूजा मे नहीं होंगे जबकि भगवान विष्णु की पूजा आखिरी अनुष्ठान तक होगी। तब से, सभी ज्योतिर्लिंग स्थान एक प्रकाश स्तम्भ को दर्शाती है। ऐसा कहा जाता है की, कुल ६४ ज्योतिर्लिंग है उनमे से १२ ज्योतिर्लिंग पवित्र मानी जाती है जैसे त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), सोमनाथ (गुजरात), मालिकारर्जुन (श्रीसैलम , आंध्र प्रदेश), महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश), केदारनाथ (हिमालय), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), वैद्यनाथ ( झारखंड), नागेश्व( द्धारका), रामेश्वरम ( रामेश्वरम, तमिलनाडु), घृष्णेश्वर (औरंगाबाद , महाराष्ट्र)।

सभी ज्योतिर्लिंग असीम प्रकाश स्तम्भ को दर्शाती है| वह भगवन शिव के स्वभाव का प्रतिक है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग पर रोज अभिषेक होता है। अति पानी के वजह से शिवलिंग का अपक्षरण हो रहा है, जो की मनुष्य के स्वभाव को दर्शाता है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का मुकुट (हीरे, मोती कीमती रत्नो) से बनाया गया है। उस रत्नजड़ित मुकुट को पांडवों की आयु का मुकुट कहा जाता है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर की जानकारी :

Jyotirlinga

नासिक, त्र्यंबकेश्वर मंदिर यह एक धार्मिक स्थल है, जहा विभिन्न पूजा करना लाभदायक है। यह कहा जाता है कि, बहुत सी घटनाओ की साक्षी यहाँ त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर मे है| जैसे भगवान राम उनके पिता राजा दशरथ का श्राद्ध करने के लिए यहाँ आये थे| गौतम ऋषि ने कुशावर्त कुंड मे पवित्र स्नान किया था। त्र्यंबकेश्वर मंदिर का मुख्य द्वार दर्शन के कतार मे लेके जाता है, जो भक्तों की सुविधा के लिए ६ से ७ लाइनों में विभाजित है।

मंदिर की शुरुआत मे, एक सफेद संगमरमर से बना नंदी है| यह नंदी भगवान शिव शंकर का वाहन है। ऐसा माना जाता है कि, यदि कोई नंदी के कान मे अपनी इच्छा / आकांक्षा बताता है, तो वह उसे भगवान शिव को बताते है| जिससे अपनी इच्छा जल्दी से पूरी होती है। नंदी मंदिर के बाद, "सभा मंडप" आता है, और फिर मुख्य मंदिर अतः मे है जहाँ लिंग स्थित है।

कुशावर्त तीर्थ :

Kushavart

कुशावर्त एक पवित्र तालाब है जो त्र्यंबकेश्वर मंदिर के परिसर मे स्थित है। कुशावर्त तीर्थ त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से ४०० मीटर की दूरी पर स्थित है| वह १७५० मे बनाया गया २१ फ़ीट गहरा कुंड है। ऐसा माना जाता है कि कुशावर्त वह जगह है जहाँ पवित्र गंगा नदी ब्रम्हगिरी पहाड़ियों पर लुप्त हो जाती है और इस तरह कुशावर्त तीर्थ की श्रेष्ठ पवित्रता का पता चलता है।

ब्रम्हगिरी पर्वत :

Bramhagiri

ब्रह्मगिरि पर्वत पर पवित्र गंगा नदी की उत्पत्ति हुई थी और जिसे आमतौर पर गोदावरी नदी के रूप मे जानी जाती है। पवित्र गंगा नदी ब्रह्मागीरी की श्रेणियों से होकर गुजरती है। कुल ७०० सीढ़ियाँ ब्रह्मागीरी पर्वत पर चढ़ने के लिए लगती है, जिन्हे ४ से ५ घंटे आवश्यक है। पवित्र गंगा नदी तीन अलग - अलग दिशाओं मे बहती है। अर्थात, पूर्व की ओर (गोदावरी के रूप मे जानी जाती है), दक्षिण की ओर (वर्ण के रूप मे जानी जाती है), और पश्चिम को पश्चिम की ओर बहने वाली गंगा के रूप मे जानी जाती है| वह जाकर चक्र तीर्थ के पास गोदावरी नदी से मिलती है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर के ठीक सामने गंगा और अहिल्या नदी का पवित्र संगम है और यहाँ लोग संतान प्राप्ति के अनुष्ठान के लिए आते हैं। ब्रह्मगिरि पर्वत की ऊंचाई समुद्र तल से कुल ४२४८ फीट उचाई है।

गंगा द्धार यह मुख्य द्धार है जो ब्रह्म गिरी पर्वत से आधा दूर है। गंगा द्धार पर पवित्र गंगा नदी का मंदिर भी मौजूद है। कहा जाता है कि गंगा पहली बार यहाँ गंगा द्धार पर प्रकट हुई थी और उसके बाद, ब्रह्म गिरि पर्वत से गायब हो गई। गोदावरी नदी ब्रह्मचारी से गंगाद्वार आती है।

त्र्यंबकेश्वर का धार्मिक महत्व :

भगवान शिव को समर्पित त्र्यंबकेश्वर एक पवित्र स्थान है। हिंदू परंपरा मे, यह माना जाता है कि जो कोई व्यक्ति त्र्यंबकेश्वर मंदिर मे दर्शन करता है, उसे मृत्यु के बाद मोक्ष (मुक्ति ) प्राप्त होता है। इसके कई कारण है जैसे यह भगवान गणेश की जन्मभूमि भी है, जिसे त्रिसंध्या गायत्री के रूप मे जानी जाती है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर श्राद्ध अनुष्ठान (पूर्वजो की आत्माओं को मुक्ति दिलाने के लिए किया जाने वाला हिंदू अनुष्ठान) करने के लिए सबसे पवित्र स्थान है।

सिंहस्त माहात्म्य भगवान राम त्र्यंबकेश्वर मंदिर मे यात्रा करने आये थे ऐसा कहा जाता है। आम तौर पर, सभी श्राद्ध विधी गंगा नदी (नासिक) मे किए जाते हैं| यदि गंगा नदी मे नहीं किया जाए, तो यह एक धार्मिक पाप के रूप मे माना जाता है। इस तरह के अन्य अनुष्ठान जैसे गंगा पूजा, देह-शुद्धि प्रायश्चित्त, तर्पण श्राद्ध, वयन, दशादान, गोप्रदान, आदि भी गंगा नदी पर किये जाते है।

त्र्यंबकेश्वर मे कई रुद्राक्ष के वृक्ष हैं| जैसे कि भगवान त्र्यंबकेश्वर को रुद्र, लघु रुद्र, महा रुद्र, अतिरुद्र पूजा के रूप मे जानी जाती है। त्र्यंबकेश्वर नगरी मे अन्य धार्मिक संस्थान भी हैं| जैसे कि पाठशाला, संस्कृत पाठशाला, कीर्तन संस्थान, और प्रवचन संस्थान। संस्कृत पाठशाला ने बहुत सरे शिष्यों को शिक्षा दी है जो अभी शास्त्र और पुरोहित के नाम से जाने जाते है।

विभिन्न पूजाए:

त्र्यंबकेश्वर मंदिर यह एक धार्मिक स्थल है जहा सारे भारत से विभिन्न अनुष्ठान करने के लिए और भगवान शिवा का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त आते है।

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